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बाल वैज्ञानिकों में बिहार शीर्ष पांच में, 11 साल में 10,440 बाल वैज्ञानिक बने हैं, बिहार से बड़ी संख्या में भेजे जाते हैं प्रोजेक्ट

 पटना
 
स्कूल स्तर पर बाल वैज्ञानिक को खोजने और राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने के लिए बिहार के साइंस फॉर सोसायटी का नाम विज्ञान प्रगति के विशेष अंक में डाला गया है। इस मासिक पत्रिका का प्रकाशन भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वैज्ञानिक और औद्योगिकी अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) द्वारा किया जाता है। इसमें सोसायटी के कार्यों के साथ प्रखंड स्तर पर बाल वैज्ञानिकों को खोज निकालने की जानकारी भी दी गयी है। 1993 में स्थापित साइंस फॉर सोसायटी के पिछले 11 साल की बात करें तो 2010 से 2021 के बीच 10 हजार 440 बाल वैज्ञानिकों को खोज कर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया है।

साइंस ऑफ सोसायटी द्वारा हर साल प्रखंड, जिला और राज्य स्तर पर बाल विज्ञान साइंस कांग्रेस आयोजित की जाती है। इसमें सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को प्रोजेक्ट बनाने का मौका दिया जाता है। हर साल 870 बाल वैज्ञानिक राज्य स्तर पर चयनित होकर राष्ट्रीय स्तर के लिए चुने जाते हैं। इन सभी को राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में शामिल होने का मौका मिलता है। विज्ञान और प्रोद्यौगिकी मंत्रालय द्वारा देश भर से 17 बाल वैज्ञानिकों का चयन किया जाता है। उन्हें जिन्हें देश भर के आईआईटी में अनुसंधान करने का मौका दिया जाता है। इसमें बिहार के एक या दो बाल वैज्ञानिक अवश्य रहते हैं।

छात्र-छात्राओं की अधिक अभिरुचि राष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा बाल वैज्ञानिक बिहार से आते हैं। इसमें साइंस फॉर सोसायटी के अलावा इंस्पायर मानक अवार्ड, किशोर विज्ञान पुरस्कार आदि शामिल हैं। इंस्पायर मानक अवार्ड में साइंस प्रोजेक्ट भेजने में बिहार का स्थान दूसरे या तीसरे स्थान पर रहता है। विज्ञान और प्रोद्यौगिकी मंत्रालय की मानें तो राजस्थान, दिल्ली, गुजरात, आंध्रप्रदेश के बाद बिहार का स्थान है। बिहार के छात्रों में नये-नये प्रोजेक्ट बनाने में अधिक रुचि रहती है। विज्ञान के विषयों में भी बिहार के छात्र-छात्राओं की अधिक अभिरुचि रही है।

इन जिलों से सबसे ज्यादा चयनित होते हैं बाल वैज्ञानिक पटना, औरंगाबाद, रोहतास, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया, दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, नालंदा, पश्चिम चंपारण, सिवान।

पहली बार बिहार साइंस फॉर सोसायटी का नाम विज्ञान प्रगति प्रत्रिका में आया है। सोसायटी द्वारा प्रखंड स्तर पर स्कूलों से बाल वैज्ञानिकों को खोजा जाता है। जिन बच्चों में अनुसंधान करने की रुचि होती है उन्हें मौका दिया जाता है।
-अरूण कुमार, अध्यक्ष, साइंस फॉर सोसायटी बिहार

 

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