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कांग्रेस के ‘भारत जोड़ो से पहले गुलाम नबी ने छोड़ी कांग्रेस

नई दिल्ली
 कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया है। पिछले कुछ दिनों से पार्टी से नाराज चल रहे आजाद ने कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है।

बता दें कि इस्तीफा देते हुए गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को लेटर भी लिखा. गुलाम नबी आजाद ने लिखा कि बड़े खेद और अत्यंत भावुक हृदय के साथ मैंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अपना आधा शताब्दी पुराना नाता तोड़ने का फैसला किया है. गुलाम नबी आजाद ने सोनिया गांधी को 5 पन्नों की चिट्ठी लिखी है.

गुलाम नबी आजाद ने सोनिया गांधी को खत में लिखा कि कांग्रेस ने इच्छाशक्ति और क्षमता दोनों खो दी हैं. भारत जोड़ो यात्रा शुरू करने से पहले पार्टी नेतृत्व को देशभर में कांग्रेस जोड़ो एक्सरसाइज करनी चाहिए. राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए गुलाम नबी आजाद ने कहा कि जब से राहुल गांधी की राजनीति में एंट्री हुई और जनवरी, 2013 में उनको पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया तब से उन्होंने पहले से स्थापित पुराने सलाहकार तंत्र को नष्ट कर दिया. सारे वरिष्ठ और अनुभवी लोगों को साइडलाइन कर दिया.

गौरतलब है कि कांग्रेस पार्टी में कई आला नेता इन दिनों आलाकमान से नाराज चल रहे हैं। हाल ही में हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस को तब बड़ा झटका लगा था जब वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने पार्टी की चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। आनंद शर्मा ने हिमाचल प्रदेश चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेज दिया था। तब आनंद शर्मा ने ट्वीट कर कहा था कि हिमाचल प्रदेश चुनाव के लिए कांग्रेस की संचालन समिति का अध्यक्ष पद भारी मन से छोड़ा है।

आनंद शर्मा के बाद अब गुलाम नबी आजाद ने भी सीधे पार्टी छोड़ने का फैसला कर लिया है। हिमाचल के कद्दावर नेताओं में गिने जाने वाले आनंद शर्मा से पहले जम्मू कश्मीर के दिग्गज गुलाम नबी आजाद को भी जम्मू कश्मीर चुनाव संचालन समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। आपको बता दें कि गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल सहित कई दिग्गज नेता कांग्रेस के जी-23 गुट के नेता थे। इस गुट के नेता कांग्रेस पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र के लिए चुनाव कराने के समर्थक हैं।

गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे की बड़ी बातें

1- गुलाम नबी आजाद ने अपनी चिट्ठी में राहुल गांधी को लेकर नाराजगी जताई है. उन्होंने लिखा कि राहुल अपने आस-पास अनुभवहीन लोगों को रखते हैं और वरिष्ठ नेताओं को साइडलाइन कर दिया. राहुल गांधी पर पहले भी पार्ट टाइम पॉलिटिशियन होने के आरोप लगते रहे हैं. इससे पहले भी हार्दिक पटेल और हिमंत बिस्वा सरमा ने उन पर समय न देने का आरोप लगाया था.

2- गुलाम नबी आजाद ने सोनिया गांधी को लिखा कि कांग्रेस ने अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस चलाने वाली राष्ट्रीय कार्यसमिति ने इच्छाशक्ति और क्षमता खो दी है.

3- कांग्रेस ने भारत जोड़ो यात्रा शुरू की है, उसको लेकर आजाद ने लिखा है कि 'भारत जोड़ो यात्रा' शुरू करने से पहले पार्टी नेतृत्व को 'कांग्रेस जोड़ो यात्रा' करनी चाहिए थी.

4- दुर्भाग्य से राहुल गांधी के राजनीति में आने के बाद जब उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया था, उन्होंने कांग्रेस के कार्य करने के तौर-तरीकों को खत्म कर दिया. उन्होंने संपूर्ण सलाहकार तंत्र को ध्वस्त कर दिया. इसके साथ ही राहुल का प्रधानमंत्री द्वारा जारी किया गया अध्यादेश फाड़ना उनकी अपरिवक्ता दिखाता है. इससे 2014 में हार का सामना करना पड़ा.

5- गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस अध्यक्ष पद पर चुनाव न कराने को लेकर भी गांधी परिवार पर निशाना साधा है. उन्होंने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि संगठन में किसी भी स्तर पर कहीं भी चुनाव नहीं हुआ.

6- इसके साथ ही आजाद ने अपने पत्र में जी-23 मामले पर भी लिखा है. उन्होंने लिखा कि जी-23 के नेताओं ने कांग्रेस की कमजोरियां बताई तो उन सभी नेताओं को अपमानित किया गया.

7- अपने पत्र में आजाद ने राहुल के आने से चर्चा की परंपरा खत्म हो गई. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 2019 की हार के बाद पार्टी की हालत और बदतर हो गई.  

8- गुलाम नबी आजाद ने आरोप लगाया कि आज कांग्रेस रिमोट कंट्रोल मॉडल से चल रही है. राहुल गांधी के पीए और सुरक्षाकर्मी पार्टी के बारे में फैसला ले रहे हैं. राहुल के नेतृत्व में 39 विधानसभा चुनावों में हार मिली.

 

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