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शिवसेना ने अलकायदा से की ‘ऑपरेशन लोटस’ की तुलना, सामना में बीजेपी पर खूब बरसी

मुंबई।

देश भर के कई राज्यों में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर शिवसेना ने बीजेपी पर निशाना साधा है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिए बीजेपी की कड़ी आलोचना की है। उद्धव ठाकरे की पार्टी ने 'ऑपरेशन लोटस' की तुलना आतंकवादी संगठन अलकायदा से की है। साथ ही बीजेपी को आतंकवाद से जोड़ा है। शिवसेना ने ऐसे आरोपों के लिए हाल के सियासी घटनाक्रमों का सहारा लिया है। भगवा पार्टी ने अपनी लेख में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के उस दावे का भी जिक्र किया है, जिसमें उन्होंने कहा था, ''आम आदमी पार्टी की सरकार को गिराने के लिए जो ऑपरेशन लोटस चलाया गया था, वह फेल हो गया है।''

शिवसेना ने अपने मुखपत्र में लिखा है कि सरकारें चुनकर लाने की बजाय विरोधियों की सरकारों को गिराने और पार्टी तोड़ने की सियासी घटनाएं खूब हो रही हैं। भगवा खेमे के कहना है कि इस कारण से विष्णु का पसंदीदा फूल ‘कमल’ बदनाम हो गया है। ‘ऑपरेशन लोटस’ अलकायदा की तरह दहशतवादी शब्द बन गया है। शिवसेना का कहना है कि दिल्ली की सरकार को गिराने के लिए शुरू किया गया ऑपरेशन कमल फेल हो गया है। इससे भाजपा की पोल खुल गई है। सामना में बिहार का भी जिक्र है, जहां हाल ही में सरकार बदली है। साथ ही यह भी कहा कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसी चंद्रशेखर राव ने अमित शाह को खुली चुनौती दी कि 'ईडी, सीबीआई आदि लगाकर मेरी सरकार गिराकर दिखाओ।'

सामने के लेख की प्रमुख बातें:
 ईडी, सीबीआई का इस्तेमाल कर  केजरीवाल की सरकार को गिराने का प्रयास चल रहा है। दिल्ली सरकार की शराब नीति, उशकी आबकारी नीति, शराब विक्रेताओं को दिए गए ठेके, ये भाजपा के दृष्टिकोण से आलोचना का विषय तो होंगे लेकिन यह निर्णय व्यक्तिगत नहीं था। पूरी सरकार इसमें साथ थी। दिल्ली के राज्यपाल की भी सहमति होती है। लेकिन कैबिनेट के निर्णय का सारा ठीकरा उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पर फोड़ा गया। उनके खिलाफ सीबीआई ने छापेमारी की। उन्हें इस केस में एक नंबर का आरोपी बनाया गया। इसके बाद इसे ईडी के पास मतलब भाजपा की विशेष शाखा के सुपुर्द कर दिया गया है। मनीष सिसोदिया पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।

मनीष सिसोदिया ने भाजपा की ‘वॉशिंग मशीन’ पर बम गिराया है। भाजपा जॉइन करो और आप के विधायकों को तोड़कर लाओ और मुख्यमंत्री बनो,  ऐसा करने पर आपके खिलाफ ईडी, सीबीआई के तमाम मामले बंद कर दिए जाएंगे- ऐसा ऑफर भाजपा द्वारा दिए जाने का दावा सिसोदिया ने किया है। आप के विधायकों को तोड़ने के लिए बीस-बीस करोड़ रुपयों का ऑफर दिए जाने का आरोप तो खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ही लगाया है। इसलिए ‘ऑपरेशन लोटस’ लोकतंत्र और आजादी के लिए कितना घातक है यह घिनौने ढंग से सामने आया है।

महाराष्ट्र में इसी तरह से ऑपरेशन चलाया गया, परंतु बड़ा राज्य होने के कारण व शिवसेना तोड़ना यही मुख्य एजेंडा होने की वजह से ईडी की धौंस, अतिरिक्त पचास खोखे इस तरह की रसद दी गई, ऐसा खुलकर कहा जा रहा है। महाराष्ट्र की भेड़ें घबराकर भाग गर्इं, उस तरह से दिल्ली के विधायक और उनके नेता नहीं भागे। वे भाजपा और ईडी के खिलाफ दृढ़तापूर्वक खड़े रहे। महाराष्ट्र में शिवसेना नेता संजय राऊत ने बेखौफ होकर ईडी का सामना किया। वे मराठी स्वाभिमान के साथ लड़े, लेकिन झुके नहीं और सच्चे शिवसैनिक की तरह जूझे। इसी तरह की सख्त नीति सिसोदिया ने अपनाई। सिसोदिया छत्रपति शिवराय के मावलों की तरह दहाड़े।

 फिलहाल कौन किसकी सुनेगा? न पेशी न सुनवाई। तारीखों का खेल चल रहा है। महाराष्ट्र में गृहमंत्री अनिल देशमुख, मंत्री नवाब मलिक, सांसद संजय राऊत की आवाज को दबाने के लिए उन्हें उठाकर जेल में डाला गया। दिल्ली के मोहल्ला क्लिनिक वाले मंत्री सत्येंद्र जैन को पुराने प्रकरण में पकड़ा। आबकारी नीति में सरकारी तिजोरी को नुकसान हुआ इसलिए मनीष सिसोदिया पर कार्रवाई चल रही है।

बिहार में सत्ता परिवर्तन होते ही राष्ट्रीय जनता दल पर सीबीआई, ईडी के छापे पड़ना, यह महज संयोग कैसे  हो सकता है? परंतु तेजस्वी यादव ने सीधे कहा, ‘महाराष्ट्र में जो हुआ वह बिहार में नहीं होगा, बिहार डरेगा नहीं। जो डरपोक हैं उन्हें ईडी, सीबीआई का डर दिखाओ।’

केंद्र  सरकार और उनके प्रमुखों को 2024 को लेकर डर लग रहा है। यह डर केजरीवाल, ममता, उद्धव ठाकरे, नीतीश कुमार और शरद पवार का हैं। इन प्रमुखों को अपने साये से भी डर लगता है। इसलिए नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान के भी पीछे पड़ गए, ऐसा लगता है। इतना बड़ा बहुमत होने के बावजूद इन लोगों को डर क्यों लगता है? इसका एक ही उत्तर है उनका बहुमत पवित्र नहीं है। वह चुराया गया है।

 

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