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प्राइवेट कंपनी के जरिए नगरीय निकायों की वर्किंग और योजनाओं पर रियल टाइम मानीटरिंग

भोपाल
प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव के बाद अब नगरीय प्रशासन और विकास विभाग नगरीय निकायों की वर्किंग और योजनाओं पर एक्शन की रियल टाइम मानीटरिंग करने के लिए एक ऐसा मानीटरिंंग सिस्टम डेवलप करना चाहता है जो नगरीय निकाय से संबंधित सभी कामों को एक साथ एक मंच पर ला सके। इसके लिए विभाग ने डिजाइनिंग, डेवलपमेंट इम्प्लीमेंटेशन और मेंटेनेंस (आईपीएमएस) साफ्टवेयर तैयार करने के लिए कम्पनियों से प्रस्ताव मांगे हैं।  

विभाग का मानना है कि इस आईपीएमएस से शहरी प्रशासन को सहायता मिलेगी और निकायों में डेवलपमेंट मैनेजमेंट और तकनीकी कर्मचारियों में निर्णय लेने को युक्तिसंगत बनाया जा सकेगा। इसके साथ ही योजना, प्रोग्रामिंग, वित्त पोषण, खरीद और संसाधनों के आवंटन में भी मदद मिलेगी। खासतौर पर स्वच्छ भारत मिशन के डेटा और एमआईएस के काम में इससे आसानी होगी।

सिंगल क्लिक से होगा सुधार
इस सिस्टम की जरूरत विभाग को इसलिए है ताकि नगरीय विकास संचालनालय एक एकीकृत निगरानी मंच विकसित कर विजुअल रिप्रजेंटेशन और सिंगल क्लिक के जरिये निकायों की दक्षता और प्रबंधन क्षमता में सुधार कर सके। ऐसे व्यवस्था बने जिससे जब भी आवश्यक हो, संग्रहीत डेटा नवीन जानकारी के साथ मिल जाए। इसी कारण नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय को एक उपयुक्त एजेंसी की तलाश में है जो (आईपीएमएस) एकीकृत परियोजना प्रबंधन प्रणाली को डिजाइन, विकसित, कार्यान्वित और बनाए रखने के लिए काम करे। इसमें स्वच्छ भारत मिशन के लिए एमआईएस सहित जानकारी अपेक्षित रहेगी।

इसलिए पड़ी जरूरत
मध्य प्रदेश स्वच्छ सर्वेक्षण नेशनल लेवल पर रैंक में सुधार की तमाम कोशिश में सफल नहीं हो पा रहा है। हालांकि इस तरह की दिक्कत अन्य राज्यों के साथ भी है। इसी कारण नगरीय प्रशासन विभाग ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लियाहै। इसके अलावा स्वच्छता पोर्टल पर पिछले महीने के डेटा के साथ मासिक डेटा की सेटिंग नहीं होने से विभाग को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही राज्य आईएसडब्ल्यूएम परियोजना के निर्माण और उसके कार्यान्वयन के प्रत्येक चरण की निगरानी करने में सफल नहीं हो पा रहा है। दूसरी ओर प्रदेश को स्टैंडअलोन सॉलिड की एक हजार के करीब डीपीआर प्राप्त होने जा रही है। इसलिए विभाग अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाएं, प्रयुक्त जल प्रबंधन, सीएंडडी अपशिष्ट प्रबंधन समय पर पूरा करने के लिए इसकी टेÑकिंग और निगरानी करना चाहता है और नए सिस्टम की जरूरत इसलिए बढ़ जाती है।

इंटरनेशनल लेवल का होगा सिस्टम
इस सिस्टम को इंटरनेशनल लेवल पर उत्कृष्ट व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए डिजाइन और विकसित किया जाएगा। इससे समकालीन प्रणालियों को अपनाने से नगरीय विकास संचालनालय को मदद मिलेगी। इस नए सिस्टम के डेवलप होने से कार्य की वित्तीय और भौतिक प्रगति की रीयल-टाइम मानीटरिंग हो सकेगी। इसके माध्यम से केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय का स्वच्छतम पोर्टल, पीएफएमएस पोर्टल, ई-नगर पालिका, ई-निविदा पोर्टल सीधे जुÞड़ सकेंगे। इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए, दो सिस्टम को एकीकृत करने की आवश्यकता है जो जीआईएस सॉफ्टवेयर, जियो टैगिंग, आॅनलाइन टीएस और एए अनुमोदन, ई-एमबी जैसी नवीनतम तकनीकों के साथ आॅनलाइन उपयोग प्रमाण पत्र, आॅनलाइन वाउचर और कैश बुक के साथ खाता इंटरलिंक करते हैं।

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