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NCRB की रिपोर्ट अपनों को बचाने में MP पुलिस अव्वल

Byadmin

Sep 9, 2022 ,

भोपाल
अपराधियों की धरपकड़ और उन्हें सजा दिलाने में पुलिस जितनी मुस्तैदी दिखाती है, उतना ही लचीलापन अपने डिपार्टमेंट के अफसर-जवानों को सजा दिलाने में नजर आता है। एनसीआरबी की रिपोर्ट इसी बात की ओर इशारा कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 168 पुलिसकर्मी और अफसर आरोपों से बरी हुए हैं। इधर, गिरफ्तारी के आंकड़े भी पुलिस का लचर रवैया उजागर कर रहे हैं। देशभर में जितने पुलिसकर्मियों को बरी किया गया है उनमें 80 फीसदी मप्र से हैं।

प्रदेश पुलिस चेहरे देखकर जांच करती है, यदि आरोपी उनके ही महकमें का है तो पुलिस की जांच में लचीलापन आ जाता है, इनके मामलों की जांच ऐसी की जाती है कि आरोपी सजा से किसी भी तरह से बच सके। एनसीआरबी की रिपोर्ट में बरी होने वाले पुलिस अफसरों और कर्मियों की संख्या को देखकर यही लगता है कि मध्य प्रदेश पुलिस अपने वालों की जांच उन्हें बचाने की दृष्टि से ज्यादा करती है। देश में कुल बरी हुए पुलिसकर्मियों और अफसरों में से 80 फीसदी पुलिसकर्मी और अफसर मध्य प्रदेश के हैं।

एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 में प्रदेश में 168 पुलिसकर्मी और अफसर आरोपों से बरी हुए हैं। जबकि देश भर में बरी होने वाले पुलिसकर्मियों और अफसरों की संख्या कुल 225 हैं। आरोपी बन बरी होने वाले देश भर में कुल पुलिसकर्मियों और अफसरों में से 80 प्रतिशत मध्य प्रदेश के हैं।  

आंध्र प्रदेश दूसरे नंबर
इस तरह के मामलों में आंध्र प्रदेश दूसरे नंबर पर है, लेकिन यहां का आंकड़ा देखते ही प्रदेश पुलिस द्वारा अपनों को बचाने की रणनीति समझा में आ जाती है। आंध्र प्रदेश में वर्ष 2021 में सिर्फ 12 पुलिसकर्मियों  ही बरी हो सके। मध्य प्रदेश के 168 के बरी होने के आंकड़े के बाद दूसरे नंबर पर आंध्र प्रदेश का यह आंकड़ा है।

गिरफ्तारी महज 16
प्रदेश में पिछले साल भले ही 33 प्रकरण पुलिसकर्मियों और अफसरों पर दर्ज हुए हो, लेकिन इनमें से सिर्फ 16 पुलिसकर्मियों या अफसरों का गिरफ्तार किया गया। दो दर्जन मामलों की चार्जशीट प्रस्तुत की गई।

हर साल की यही कहानी
प्रदेश में पुलिस अफसरों और जवानों को अपराधों से बचाने की यही कहानी है। वर्ष 2020 में भी 210 पुलिसकर्मी और अफसर बरी हो गए थे। जबकि 13 को ही सजा मिल सकी थी। इनके अलावा 56 पुलिस अफसर और कर्मियों के केस वापस हो गए थे यह डिस्पोज ऑफ  कर दिए गए थे। इस वर्ष 223 पुलिस अफसरों और जवानों के खिलाफ ट्रायल हुआ था।

वर्ष 2020 में 107 प्रकरणों में पुलिस वाले आरोपी बनाए गए थे। जिसमें से 6 मामलों में कोर्ट की ओर से खात्मा लगाया गया था। वहीं 56 मामलों में चार्ज शीट पेश की गई थी और 77 मामलों में अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत हुई थी। उस वर्ष देश में 234 पुलिसकर्मी और अफसर विभिन्न मामलों से बरी हुए थे, इनमें से 90 फीसदी बरी होने वालों की संख्या प्रदेश पुलिस में से थी।

46 के खिलाफ केस वापस, जांच में पुलिस ने ही माना निर्दोष
खासबात यह है की पुलिस महकमें के 171 अफसरों और जवानों की ट्रायल वर्ष 2021 में पूरी हुई थी, इनमें से सिर्फ तीन पुलिसकर्मियों को ही सजा मिल सकी। बाकी के सभी बरी हो गए। वहीं 46 पुलिसकर्मी और अफसरों के खिलाफ दर्ज केस वापस ले लिए गए या जांच में ही इन्हें पुलिस ने निर्दोष मान कर नाम हटा दिए।

इस तरह से भी 46 पुलिसकर्मियों और अफसरों को प्रकरणों से बाहर निकाला गया। हालांकि इस दौरान पुलिस ने 33 प्रकरण पुलिसकर्मियों के ऊपर दर्ज किए थे। इनमें कोई भी केस अदालत से खारिज नहीं हुआ। इसमें से 18 प्रकरणों में चार्जशीट अदालत में पेश की गई और 15 प्रकरणों की फाइनल रिपोर्ट दी गई।

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