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14 सालों से धूल फांक रहे फ्लोटर पंपों का अब होगा आग बुझाने में इस्तेमाल

 लखनऊ
 
कई सालों से धूल फांक रहे फ्लोटर पंपों की सीबीआई जांच के दायरे में आने के कारण अब इसे इस्तेमाल लाने की कवायद शुरू हो चुकी है। लेवाना होटल अग्निकांड के बाद अग्निशमन निदेशालय ने इस पंपों को इस्तेमाल में लेने की अनुमति मांगी है।

साल 2008 में बसपा के शासनकाल में अग्निशमन उपकरणों की खरीद हुई थी। इसमें 40 फ्लोटर पंप भी खरीदे गए थे और इसका भुगतान भी कर दिया गया था। लेकिन इसके एक साल बाद ही प्रदेश में सरकार बदल गई तो इसमें घोटाला सामने आया। घोटाले की सीबीआई जांच शुरू हुई तो पता चला कि चेन्नई की फर्म को इन पंपों की आपूर्ति का ठेका दिया गया था। फ्लोटर पंप की बाजार में कीमत डेढ़ से दो लाख रुपये तक थी, लेकिन उसे लगभग दोगुना दाम में खरीदा गया था। यह जांच शुरू होने से पंपों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई, जो जांच पूरी होने के बाद भी लगी रही।

मंजूरी के लिए शासन को भेजा गया पत्र
सूत्रों के अनुसार फ्लोटर पंप लखनऊ में ही एक फायर स्टेशन में रखे हुए हैं। इस बीच अग्निशमन विभाग ने कई नए उपकरणों की खरीद की प्लोटर पंपों पर ध्यान नहीं गया। लेवाना होटल अग्निकांड के बाद विभाग की इन पर नजर पड़ी तो मंजूरी के लिए शासन को पत्र भेजा गया। ये पंप बिना दमकल की गाड़ियों के ही आग बुझाने में प्रभावी होते हैं।

दमकल की गाड़ियों की कमी के कारण ही इन पंपों को खरीदा भी गया था। पेट्रोल से चलने वाले ये पंप पानी में तैरते हैं और इन्हें किसी तालाब या पानी के बड़े टैंक में डालकर पाइप से दूर किसी स्थान तक पानी पहुंचाया जा सकता है। दूर खड़े दमकल वाहन में पानी भरने में भी इनका इस्तेमाल हो सकता है। किसी ऊंचे भवन में आग लगने पर वहां बने वाटर टैंक में इसे डालकर सीधे इसके पाइप से पानी की बौंछार मारी जा सकती है।

 

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