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भारत की G-20 अध्यक्षता आज से शुरू, PM मोदी बोले- दुनिया में बढ़ेगी एकता की भावना

नईदिल्ली
भारत ने आज (1 दिसंबर) से औपचारिक रूप से G20 का अध्यक्ष पद संभाल लिया है. भारत पूरे एक साल के लिए दुनिया के आर्थिक रूप से संपन्न देशों के समूह G20 की अध्यक्षता करेगा. जी-20 दुनियाभर के कारोबार का 75 फीसदी से ज्यादा और दुनिया की दो-तिहाई आबादी का भी प्रतिनिधत्व करता है. G20 की अध्यक्षता संभालते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया सामने आई है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "आज जैसे कि भारत ने अपनी G-20 अध्यक्षता शुरू कर दी है, इस पर कुछ विचार लिखे हैं कि हम आने वाले वर्ष में वैश्विक भलाई के लिए समावेशी, महत्वाकांक्षी और निर्णायक एजेंडे के आधार पर कैसे काम करना चाहते हैं. G20 की पिछली 17 अध्यक्षताओं के दौरान आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने, इंटरनेशनल टैक्सेशन को तर्कसंगत बनाने और विभिन्न देशों के सिर से कर्ज के बोझ को कम करने समेत कई महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए हैं."

'क्या G20 अभी भी और आगे बढ़ सकता है?'

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, "हम इन उपलब्धियों से लाभान्वित होंगे और यहां से और आगे की ओर बढ़ेंगे. अब जबकि भारत ने इस महत्वपूर्ण पद को ग्रहण किया है, मैं अपने आपसे यह पूछता हूं- क्या जी-20 अभी भी और आगे बढ़ सकता है? क्या हम समग्र मानवता के कल्याण के लिए मानसिकता में मूलभूत बदलाव को उत्प्रेरित कर सकते हैं?" पीएम ने कहा कि मेरा विश्वास है कि हां, हम ऐसा कर सकते हैं.

प्रधानमंत्री ने जाहिर की चिंता

प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, "पूरे इतिहास के दौरान मानवता का जो स्वरूप होना चाहिए था, उसमें एक प्रकार की कमी दिखी. हम सीमित संसाधनों के लिए लड़े, क्योंकि हमारा अस्तित्व दूसरों को उन संसाधनों से वंचित कर देने पर निर्भर था. दुर्भाग्य से हम आज भी उसी शून्य-योग की मानसिकता में अटके हुए हैं. हम इसे तब देखते हैं, जब विभिन्न देश या क्षेत्र, संसाधनों के लिए आपस में लड़ते हैं. हम इसे तब देखते हैं, जब आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को हथियार बनाया जाता है. हम इसे तब देखते हैं, जब कुछ लोगों द्वारा टीकों की जमाखोरी की जाती है, भले ही अरबों लोग बीमारियों से असुरक्षित हों."

PM ने भारतीय संस्कृति का किया जिक्र

प्रधानमंत्री ने कहा, "कुछ लोग यह तर्क दे सकते हैं कि टकराव और लालच मानवीय स्वभाव है. मैं इससे असहमत हूं. भारत में प्रचलित ऐसी ही एक परंपरा है जो सभी जीवित प्राणियों और यहां तक कि निर्जीव चीजों को भी एक समान ही पांच मूल तत्वों- पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के पंचतत्व से बना हुआ मानती है. इन तत्वों का सामंजस्य हमारे भीतर और हमारे बीच भी भौतिक, सामाजिक, पर्यावरणीय कल्याण के लिए आवश्यक है."

'हमारा युग युद्ध का युग ना हो'

पीएम मोदी ने कहा, "भारत की जी-20 की अध्यक्षता दुनिया में एकता की इस सार्वभौमिक भावना को बढ़ावा देने की ओर काम करेगी, इसलिए हमारा थीम- 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' है. यह सिर्फ एक नारा नहीं है. यह मानवीय परिस्थितियों में उन हालिया बदलावों को ध्यान में रखता है, जिनकी सराहना करने में हम सामूहिक रूप से विफल रहे हैं. हमारे युग को युद्ध का युग होने की जरूरत नहीं है. ऐसा बिलकुल नहीं होना चाहिए!"

प्रधानमंत्री ने भारतीय अर्थव्यवस्था का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, "आज भारत सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है. हमारे प्रतिभाशाली युवाओं की रचनात्मक प्रतिभा का पोषण करते हुए हमारा नागरिक-केंद्रित शासन मॉडल एकदम हाशिए पर पड़े नागरिकों का भी ख्याल रखता है."

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